Pachmarhi – Queen of Satpura and nature’s abode, best tourism spot in Madhya Pradesh – Hill station PACHMARHI (पचमढ़ी – सतपुड़ा की रानी और प्रकृति का आवास, मध्य प्रदेश में सबसे अच्छा पर्यटन स्थल – हिल स्टेशन पचमढ़ी)

Pachmarhi The Queen of Satpura
Pachmarhi The Queen of Satpura

PACHMARHI – QUEEN OF SATPURA AND NATURE’S ABODE, BEST TOURISM SPOT IN MADHYA PRADESH – HILL STATION PACHMARHI (पचमढ़ी – सतपुड़ा की रानी और प्रकृति का आवास, मध्य प्रदेश में सबसे अच्छा पर्यटन स्थल – हिल स्टेशन पचमढ़ी)

Pachmarhi : पचमढ़ी भारत का ह्रदय कहे जाने वाले राज्य मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्तिथ एक बहुत ही खूबसूरत पर्वतीय पर्यटन स्थनल है। यह मध्यपदेश का एक मात्र हिल स्टेशन है। पचमढ़ी में पर्यटकों के लिए अनेक प्राकृतिक एवं सुंदर दर्शनीय स्थील हैं। पचमढ़ी अपनी सुन्दरता के लिए न केवल भारत बल्कि समूचे विश्वे में प्रसिद्ध है। यहां शांति, खूबसूरत पर्वत, सदाबहार हरियाली, सुंदर जलप्रपात और लुभावने दृश्य पचमढ़ी की सुन्दरता को और निखारते हैं। पचमढ़ी को उसकी सुंदरता के कारण सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। पचमढ़ी हिल स्टेशन घूमना अन्य हिल स्टेशनों में घूमने के मुकाबले सस्ता पडता है। आगे लेख में हम पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा के बारे मे आवश्यक जानकारी देने जा रहे हैं, जैसे कि पचमढ़ी का इतिहास क्या है, पचमढ़ी घूमने जाने का सही समय क्या है, पचमढ़ी घूमने कैसे जाएं, पचमढ़ी में क्या-क्या दर्शनीय स्थल हैं-

पचमढ़ी में प्रमुख पर्यटक स्थल – Major Tourist Places In Pachmarhi

Jatashankar Pachmarhi जटाशंकर पचमढ़ी –

जटाशंकर एक पवित्र गुफा है। जटाशंकर का मार्ग चट्टानों वाला है। पचमढ़ी को कैलाश पर्वत के बाद महादेव का दूसरा घर माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान शिव भस्मासुर नामक राक्षस से बचने के लिए पचमढ़ी की गुफाओं और खोहों में छुपे थे। जटाशंकर पचमढ़ी मे तो सालभर पर्यटकों का आवागमन रहता है, लेकिन श्रावण माह में और शिवरात्रि के अवसर पर सैंकड़ों श्रृद्धालु यहाँ पूजा करने के लिए आते हैं। श्रावण माह में यहां मेला जैसा नजारा रहता है।

Pandav Gufa ( Caves ) Pachmarhi पांडव गुफाएं पचमढ़ी –

पांडव गुफा के बारे में कुछ पुरातत्वविद मानते हैं कि इन गुफाओं को बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बनाया गया था। पांडव गुफा गुफाओं की बनावट और रचना देखकर अनुमान लगाया जा सकता है। इन गुफाओं का निर्माण 6 वीं से 10 वीं शताब्दी के मध्य होना आकलित किया गया है।इन गुफाओं मे आवाज गूंजती है, यह इन गुफाओं की मुख्य विशेषता है।

पांडव गुफाओं के बारे अन्य मान्यता के अनुसार इन गुफाओं में प्राचीन समय में पांडव आए थे। माना जाता है कि पांडव निष्कासन काल के दौरान यहां आकर काफी समय तक रहे थे। युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, भीम पाॅच पांडव थे और उनकी पत्नी द्रौपदी थी। इसी मान्यता के अनुसार ही इन गुफाओं को पांडव गुफा कहा जाने लगा। इन गुफाओं में अलग-अलग कक्ष है, जिनमें पांडव रहते थे।

Bade mahadev pachmarhi बड़े महादेव पचमढ़ी –

पचमढ़ी से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित 30 फुट लंबी बड़े महादेव की गुफा में ठंडा पानी लगातार बहता रहता है। इस गुफा में एक पूजनीय शिवलिंग है, जिसकी पूजा करने के लिए हर साल श्रृद्धालु तीर्थयात्री काफी दूर दूर से यहां आते हैं।
इस स्थल का पौराणिक महत्व भी है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव ने भस्मासुर को वरदान दिया था। वरदान प्राप्त कर भस्मासुर प्राप्त वर को आजमाने के लिए भगवान की तरफ हाथ बढ़ाया। उससे बचने के लिए भगवन शिवजी ने जिन कंदराओं की शरण ली थी उसमें पचमढ़ी भी शामिल है। इसी स्थान पर बड़ा महादेव मंदिर स्थापित हुआ। किंवदंतियों अनुसार भगवान विष्णु ने शिवजी की मदद के लिए मोहिनी नाम की अप्सरा का रूप लेकर भष्मासुर का वध इन्हीं कंदराओं में किया था। अब यहां बड़ा महादेव मंदिर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाडियों पर बनी सर्पाकार पगडंडिया हैं। कहा जाता है कि इन सर्पाकार पगडंडिया से गुजरने से कालसर्प दोष भी दूर होता है।

Chauragarh Dhupgarh Pachmarhi चौरागढ़ धूपगढ़ पचमढ़ी –

चौरागढ़ धूपगढ़ पचमढ़ी की दो अलग-अलग पहाड़ियां है जहां से सूर्योदय और सूर्यास्त के मनोहारी दृश्य देखा जा सकता है। धूपगढ़ मध्यप्रदेश की सबसे ऊंची चोटी है। सबसे ऊंची चोटी होने के कारण मध्यप्रदेश में सूर्य की किरण सबसे पहले धूपगढ़ पहाड़ी पर ही पड़ती है।

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Be Fall Pachmarhi बी फॉल पचमढ़ी –

बी फॉल पचमढ़ी के मुख्य आकर्षण का केंद्र है। यह पचमढ़ी से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित है। इस झरने मे लगभग 150 फुट की ऊंचाई से पानी नीचे गिरता है, जो अत्यंत सुंदर लगता है। इस झरने का शानदार और मनोहारी दृश्य मन को प्रफुल्लित कर देने वाला है।

Handi Khoh Pachmarhi हांडी खोह पचमढ़ी –

पचमढ़ी मे हांडी खोह नाम की खाई है जो यहाँ की सबसे बड़ी तथा सबसे गहरी खाई है। हांडी खाई की गहराई लगभग 300 फिट है, खाई मे बहुत ही घना जंगल है, इसी जंगल से ये खाई ढकी हुई है। इस खाई
मे पानी बहने की आवाज सुनाई देती है जो मन को बहुत ही सुकून देने वाला है। हांडी खोह खाई किसी हांडी (बर्तन) की तरह दिखने वाली है जिस कारण इस खाई का नाम हांडी खोह पड़ा।

Satpura National Park Pachmarhi सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान पचमढ़ी –

सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान भारत का एक सुन्दर और वनस्पतियों से भरा पार्क है। ये राष्ट्रीय उद्यान लगभग 525 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है। इस उद्यान का उद्घाटन डॉक्टर सलीम अली (भारतीय पक्षी विज्ञानी) ने सन 1981 में किया था। राष्ट्रीय उद्यान मे बाघ, तेंदुआ, चीता जैसे जंगली जानवरों को देखा जा सकता है। यहाँ प्रतिवर्ष नवंबर – दिसंबर माह में प्रवासी पक्षी आते हैं। इस उद्यान में 300 से अधिक प्रजातियों के पेड़-पौधे तथा और फूलों की प्रजाति है।

पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व

पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व एक गैर-उपयोग संरक्षण क्षेत्र है, जो मध्य भारत के सतपुड़ा रेंज में स्थित है। इस संरक्षण क्षेत्र को भारत सरकार द्वारा वर्ष 1999 में बनाया गया था। यूनेस्को द्वारा इसे वर्ष 2009 में बायोस्फीयर रिजर्व नामित किया था।

How to reach Pachmarhi पचमढ़ी कैसे जाएं –

पचमढ़ी जाने के लिए रेल मार्ग, सड़क मार्ग, हवाई मार्ग तीनों ही मार्ग से जाया जा सकता है। प्रमुख शहरों से पचमढ़ी की दूरी – भोपाल से लगभग 190 कि.मी., होशंगाबाद से लगभग 118 कि.मी., जबलपुर से लगभग 252 कि.मी.।

Best time to visit in Pachmarhi पचमढ़ी यात्रा का उपयुक्ते समय –

गर्मियों के मौसम में घूमने के लिए पचमढ़ी जाना जाता है। पचमढ़ी घूमने के लिए उपयुक्तो और शानदार समय अक्टूबर से जून है। इस समय में पर्यटकों का आवागमन अत्य धिक रहता है।

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